भगवान राम के समय भी मनुस्मृति थी। तो भगवान राम ने भीलनी के जूठे बैर, निषाद राज के साथ मित्रता और अपने राज तिलक पर मुख्य अतिथि निषाद राज को बनाया। और केवट को भी अपने बराबर का दर्जा दिया। भील समुदाय से भीलनी और निषाद समुदाय से निषादराज और मल्लाह समुदाय से केवट आजकल सारे दलित कहलाने लगे हैं।
तो यह कैसे संभव था? और अगर ब्राह्मणवाद हावी था। तो राम क्षत्रिय थे, फिर ब्राह्मण राम की पूजा क्यों करते हैं और रावण का पुतला क्यों जलाते हैं? अगर सती प्रथा अनिवार्य थी मनुस्मृति में तो राम के समय भी थी तो दशरथ की तीन पत्नियां सती क्यों नहीं हुई? राजा शांतनु की पत्नी सत्यवती क्यों सती नहीं हुई। चित्र वीर्य विचित्र वीर्य की पत्नियों अंबिका और अंबालिका क्यों सती नहीं हुई? कंस, जरासंध, शिशुपाल की पत्नियाँ क्यों सती नहीं हुई। लाखों योद्धा महाभारत के युद्ध में मारे गए उनकी पत्नियां क्यों सती नहीं हुई। चंद्रगुप्त मौर्य बिंदुसार गुप्त मौर्य सम्राट अशोक गुप्त मौर्य एवं हर्षवर्धन इत्यादि की पत्नियाँ सती क्यों नहीं हुई?
क्या कारण था कि मुगलों के आने के बाद सती प्रथा शुरू हुई। कारण सीधा था हमारी जिस प्रकार आज आपस में एक दूसरे से नफरत और फूट है। इस प्रकार एक क्षत्रिय की दूसरे पर क्षत्रिय से एक राजा की दूसरे राजा से आपस में फूट के कारण जब मुग़ल हमला करते थे जो समूह में अरब इस्लामी देशों से आए थे और राजा को मार दिया जाता था और राजा के राज्य पर कब्जा कर लिया जाता था।
तो उनकी राजकुमारी और रानियों को यौन दासियों के रूप में प्रयोग करना शुरू कर दिया जाता था और अपना ही समाज जो दूसरे राज्य में राजा होता था। वह तालियां बजाता था उसे राजा के हारने पर और उन रानियों और राजकुमारी को यौन दासियों के रूप में प्रयोग होने पर। तब उन राजकुमारियां एवं रानियों ने मुगलों के अत्याचार से भयभीत होकर आत्मदाह करना या सती होना या जिसको जौहर कहते हैं वह करना शुरू कर दिया।
-मतलब तुर्क और मुगलों के यौन उत्पीड़न के भय से ग्रसित होकर आत्मदाह की प्रक्रिया शुरू हुई उसको सती प्रथा कह दिया बाद में जब देखा गया कि अब मुगलों का भय समाप्त है। तो फिर राजा राममोहन राय को बंगाल के संन्यासियों ने समर्थन दिया और उस प्रथा को बंद करवा दिया। उस प्रथा का तो आज भी पता चलता है कि हिंदू एक शादी करता है और अरब में आज भी लोगों को यौन दासियों के रूप में वहु विवाह व्यवस्था रखी गई है संविधान के अनुसार भी।
जय श्री राम हर हर महादेव
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